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Health care, is the maintenance or improvement of health via the weight loss treatment, recovery, or cure of disease, illness, corona virus, injury, and other

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Saturday, 2 January 2021

1/02/2021

तेजी से वजन घटाने के लिए जीरे का पानी का उपयोग- Jeera Water for Fast Weight Loss in Hindi

        

      नमस्कार दोस्तों! हमारे घर में मिलने वाला एक महत्वपूर्ण मसाला जीरा है. जो यह भोजन को सुंगध और स्वादिष्ट बनाता है . जीरा हमारे भोजन को स्वादिष्ट बनाने के साथ वजन घटाने में भी काम में आता है और इससे अनेक बीमारियां भी दूर होती है. 


         जब वजन कम करने की और चर्बी को खत्म करने की बात आती है तो जीरे की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होती है .अगर आप प्रतिदिन जीरा खायेगें और जीरे का पानी पियेंगे तो आपका मोटापा कम होगा और पेट भी सही रहेगा और साथ में पूरे शरीर का फैट कम हो जायेगा.

      एक रिसर्च में महिलाओं को दो ग्रुप में विभाजित (बाटा) किया गया. दोनों ग्रुपों का नाम अ(A) और ब(B) रखा. अ(A) ग्रुप की महिलाओं को जीरा का सेवन करने की सलाह दी और ब(B) ग्रुप में डाइट प्लान फॉलो करने की सलाह दी. कुछ दिनों बाद देखा अ(A) ग्रुप की महिलाओं का वजन ब(B) ग्रुप की महिलाओं से वजन ज्यादा कम हुआ. जिससे यह माना जाता है कि जीरा खाने से जीरा का पानी पीने से व्यक्ति की तेजी से कैलोरी खत्म हो सकती है क्योंकि इसमें चयापचय में काफी वृद्धि होती है. जीरा पाचन में भी काफी महत्वपूर्ण फायदा करता है.


जीरे का पानी



वजन कम करने के लिए जीरे का उपयोग कैसे करें(How to use cumin to lose weight) ? 


जीरे का पानी -जीरे को रात में पानी में भिगोकर रख दें ,सुबह उबालकर पानी को छानकर भूखे पेट सेवन करें. जीरे का पानी को और स्वादिष्ट बनाने के लिए आप इसमें शहद और नींबू का भी उपयोग कर सकते हैं. ऐसे 3 सप्ताह तक रोजाना खाली पेट पिए . वजन कम करने के लिए जीरे का पानी काफी लाभदायक है.


जीरा पाउडर दही- आप एक चम्मच दही के साथ एक चम्मच जीरा का पाउडर मिलाएं और इसे अपने सुबह और शाम के भोजन के बाद सेवन करें .ऐसा आप 21 दिनों तक लगातार करें इससे आपका वजन जरूर कम होगा.


जीरा पाउडर - भोजन के 1 घंटे के बाद एक कप पानी में पानी में जीरा पाउडर और चुटकी भर सेंधा नमक डालकर मिक्स करें.आप इस स्वादिष्ट पानी को पीकर आपका वजन कम कर सकते हैं . 



  जीरा खाने के फायदे क्या है (What are the benefits of eating cumin)? 


         जब जीरे के फायदे गिनने के बाद आती है तो इसकी तो इसकी तो कोई सीमा ही नहीं है क्योंकि जीरा के अनेक फायदे हैं क्योंकि जीरे में अनेक पोषक तत्‍व होते हैं.


•   जीरा का सेवन पाचन और पुरानी बीमारियों को रोकने में भी हमारी मदद करता है.

•   शरीर से खराब कोलेस्ट्रोल को कम करने के लिए जीरे का इस्तेमाल किया जाता है.

•   चर्बी कम करने के लिए और वजन घटाने में तो यह जीरा कारगर इलाज है.

•   जीरा शरीर में सूजन को कम करने में भी हमारी मदद करता है.

•   जीरा लो टाॅक्सिसिटी को बढ़ावा देता है और उसका पानी शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने का काम करता है.

जीरे का नुकसान क्या है (What is the loss of cumin)? 


  जीरा के फायदे और नुकसान दोनों होते हैं क्योंकि हर चीज के दो पहलू होते हैं. यह तो आप जान चुके हैं कि जीरा मोटापा कम कर सकता है लेकिन इसका अत्यधिक सेवन करने से हमें किन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. यह ध्यान देने की बात है

डायरिया ,पेट में जलन ,डकार आना

 जीरे के पानी का उपयोग गर्भावस्था में सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.

       अब तो आप जान चुके होंगे जीरा और जीरे के पानी किस प्रकार वजन कम करता है. यह बेहद आसान है.अगर आप अपना वजन कम करना और शरीर की अतिरिक्त (Extra) चर्बी को हटाने की सोच रही हैं तो आज से जीरे का पानी या जीरा शुरू कर दे. साथ में एक बात ध्यान रखें अगर इसके प्रतिदिन सेवन करने के दौरान आपको कुछ दुष्ट प्रभाव नजर आते हैं तो इसे बंद कर दें और डॉक्टर से संपर्क करें . वजन कम करने के लिए जीरे का उपयोग आर्टिकल आपको कैसा लगा और ये कितना कारगर हुआ .हमें कमेंट करके कमेंट बॉक्स में बताएं और आपको पसंद आए तो ज्यादा से ज्यादा शेयर करें. मोटापा से जुड़ी कोई भी समस्या यह सवाल हो तो आप हमें पूछ सकते हैं.

Saturday, 26 December 2020

12/26/2020

म्यूकोरमाइकोसिस (Mucormycosis) क्या है? कोरोना रोगी(Covid-19) और शुगर वाले (Diabetes) को क्यों है इससे खतरा?


‌      दुनिया अभी तक कोरोना संक्रमण से उभर नहीं पाई थी एक और जानलेवा बीमारी ने दुनिया में दस्तक दी .कोरोना के मरीजों और कोरोना से ठीक हुए मरीजों को एक खतरनाक बीमारी घेर रही है जिसका नाम है म्यूकोरमाइकोसिस (Mucormycosis) . हालाँकि इससे संबंधित मामले देशों में कम दिखाई दे रहे हैं, लेकिन यह एक बहुत ही खतरनाक बीमारी है. ऐसा नहीं है कि म्यूकोरमाइकोसिस बीमारी कुछ ही लोगों को हो सकती है, यह हर उस व्यक्ति तक पहुंच सकती है जिसके शरीर में इम्युनिटी पॉवर कम है. कोरोना का मतलब शरीर का एक साथ कई अटैक, कोरोना की वजह से कई गंभीर बीमारियां ,कोरोना से नई मुसीबतों का खतरा बढ़ता जा रहा है .पहले कोरोना अब नहीं बीमारी सबको बहुत दहला रही है .आइए जानते हैं इस बीमारी के लक्षण, बचाव, असर और जानकारी.
‌ 
Mucormycosis

‌ एक बीमारी कोरोना के बाद भारी ( Heavy after a disease corona) :-


                      कोरोना होने के बाद म्यूकोरमाइकोसिस होने की आशंका ज्यादा बढ़ जाती है. कोरोना के बाद यह बीमारी बहुत तेजी से दुनिया में फैल रहा है. इसका असर देशों में अलग-अलग जगह पर दिखाई दे रहा है .स्वास्थ्य मंत्रालय चिंता जताते हुए  यह कहा है कोरोना संक्रमित और कोरोना से ठीक हुए मरीजों को बहुत सावधानी रखनी चाहिए. हर वो शख्स जिसने कोरोना को हराकर बड़ी जंग तो जीत ली है लेकिन उसकी वजह से इम्यूनिटी पावर में जो असर पड़ा है जिसके कारण म्यूकोरमाइकोसिस उसके शरीर में घुसने का रास्ता दे रही है. कोरोना के संक्रमण के बाद फंगल संक्रमण भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है.


Mucormycosis


‌म्यूकोरमाइकोसिस बिमारी क्या है (What is Mucormycosis disease)? 


‌             इस बीमारी का नाम म्यूकोरमाइकोसिस है.यह एक फंगल संक्रमण है. म्यूकोरमाइकोसिस फंगल एक ऐसा है जो अधिकतर हवा में रहता है जिनकी बॉडी इम्यूनिटी पावर कम होती है उसके अंदर चला जाता है अंदर जाकर टिशू को डैमेज करके खून की कोशिकाओं में घुस जाता है . यह संक्रमण नाक से शुरू होता है जो धीरे-धीरे आंखों तक पहुंचाता है फिर जबड़े और दिमाग तक पहुंच जाता है . यह बीमारी अपने आप में एक छोटी बीमारी भी हो सकती है लेकिन यह एक बहुत बहुत खतरनाक रूप भी ले सकती है.

‌ म्यूकोरमाइकोसिस  के लक्षण क्या है (What are the symptoms of Mucormycosis)? 

‌ 
‌ 1. नाक बंद रहना.
 2. नाक ज्यादा सूजना और सुखना.
‌ 3. गालों का सुन्न पर जाना.
‌ 4. आंख का सूजन, दर्द होना और लाल होना.
5.‌ तालु का काला दिखना.
‌6. दातों का गिरना.
‌7. आंखों की रोशनी जाना . 
‌9. नाक में काला क्रस्ट जमा होना.

म्यूकोरमाइकोसिस बिमारी का असर क्या होता है (What is the effect of Mucormycosis disease)? 


‌ इस बीमारी को लेकर देश में किसी को अधिकतर जानकारी नहीं है .देश के अलग-अलग जगह में फैल रही ऐसे में आपको यह जानना बहुत जरूरी है म्यूकोरमाइकोसिस बिमारी शरीर पर क्या असर दिखा रही है
‌ 
‌ • आंखों की रोशनी चली जाती है.
‌ •  जबड़े की और नाक की हड्डी निकालने पड़ सकती है.
‌•  दिमाग संक्रमण होने के बाद 80 परसेंट लोगों की मृत्यु हो जाती है.
•  ‌दिल की धड़कन बंद हो जाती है.

यह लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं






म्यूकोरमाइकोसिस बिमारी का इलाज क्या है (What is the treatment of Mucormycosis disease)? 

 
• शुरुआत में इसका इलाज सामान्य है.
• दूरबीन से नाक की सफाई काम में आती है.
• ऑपरेशन के जरिए से ठीक किया जा सकता है.
• जल्दी से बायोप्सी कराएं.

  टीवी पर न्यूज़ और अखबार में छपी खबर के अनुसार सर गंगा राम अस्पताल के सीनियर ई एन टी  (ENT) सर्जन डॉक्टर मनीष मुंजाल ने कहा कि गंभीर कोरोना कोरोनावायरस के बाद म्यूकोरमाइकोसिस बीमारी लगातार बढ़ती जा रही है. यह बीमारी ना तो आसानी से पता चल पा रही है और ना ही इसका इलाज आसान है . इस पूरी बीमारी से हम लड़ सकते हैं कैसे दूर रह सकते हैं कैसे अपने परिजनों को सुरक्षित रख सकते हैं यह सब जानकारी दी है इसका ध्यान रखें.कोरोना से ठीक हुए मरीजों में फैल रहा नया संक्रमण मरीजों के आंख नाक दिमाग जबड़े तक पहुंच रहा है. जहां पर यह असर डालता है बच पाना मुश्किल है जैसे की आंख और दिमाग.आंख में पहुंचने के बाद आंख की रोशनी चली जाती है दिमाग में पहुंचने के बाद 80% लोगों की मृत्यु हो जाती है.

Mucormycosis


आशा है कि म्यूकोरमाइकोसिस (Mucormycosis) बीमारी के बारे में जानकारी पढ़कर यह बिमारी क्या है आप जान  चुके होगें. यह आर्टिकल आपको कैसा लगा कमेंट करके जरूर बताइए.


Thursday, 24 December 2020

12/24/2020

अनार के फायदे और नुकसान (Anar Ke Fayde Or Nuksaan)-Pomegranate Benefits And Side Effects In Hindi 2021

                अनार(Pomegranate) एक ऐसा फल है जो अधिकतर महंगा रहता है फिर भी छोटे हो या बड़े सबको बहुत पसंद आता है. यह जितना मीठा और स्वादिष्ट होता है उतना ही उसका छिलका कड़वा और कठोर होता है . छिल्का कड़वा और कठोर होने के बावजूद भी उसमें काफी काफी औषधीय गुण पाए जाते हैं. किसी भी व्यक्ति को कोई भी बीमारी या रोग हो तो डॉक्टर सबसे पहले अनार के सेवन की सलाह देते हैं. आयुर्वेद ने अनार को एक चमत्कारी औषधीय गुण वाला फल माना है. अनार नहीं बल्कि उसका पेड़ और अनार छिलके भी औषधीय गुणों से भंडार भरा हुआ है. अनार खाने से इम्यूनिटी पावर बढ़ता है जो  इस कोरोना और कोरोना नए स्ट्रेन से बचने में बहुत मदद करेगा.आप सब यह तो जानते ही और सुना भी होगा ! अनार खाने के बहुत फायदे हैं लेकिन क्या आपको यह पता है अनार खाने से कौन-कौन से फायदे हैं? आइए हम जानते हैं अनार के फायदे कौन-कौन से होते हैं.


  अनार का परिचय, अनार क्या है और कैसा होता है (Introduction of pomegranate, what is pomegranate and how is it) ? 


    अनार एक फल है जो लाल रंग का होता है .उसमें सैकड़ों लाल रंग के छोटे-छोटे रसीली रसीली दाने होते हैं.यह एक ऐसा फल है जो बहुत मीठा और स्वादिष्ट होने के साथ यह हमारे शरीर में खून को भी बढ़ाता है और इसके छिलके भी बहुत सी बीमारियों में हमारे काम आते है. पुरानी कहावत है "एक अनार सौ बीमार " सही कहा है एक अनार सौ बीमारियों को ठीक करती है. इसका का जूस सबके लिए लाभदायक होता है. अनार का जूस पीने से टेस्टास्टेराॅन (Testosterone) की मात्रा को बहुत तेजी से बढ़ता है . स्वास्थ्य की दृष्टि से देखा जाए तो अनार एक महत्वपूर्ण लाभदायक फल है. अनार के जूस पीने के बजाय इसके दाना खाना ज्यादा ज्यादा फायदेमंद रहता है. अनार को हमेशा चबा- चबाकर खानी चाहिए .अगर इसे आप चबा- चबाकर नहीं खाएंगे तो यह सेहत के लिए काफी नुकसानदायक हो सकता है . अनार खाने से दिल दिमाग और आंखों की रोशनी अच्छी रहती है.



 अनार कितने प्रकार की होती है (What are the types of pomegranate) ? 


         अनार कई प्रकार के होते है खट्टे, मीठे,और खट्टे मीठे . लेकिन खासतौर पर अनार तीन  प्रकार के होती है.
 1. देसी अनार व खट्टे मीठे होते हैं.
 2. कंधार के अनार मीठे होते हैं. 
 3.  काबुल अनार मीठे होते हैं.
काबुल के अनार को बेदाना बेदाना  भी कहते हैं. यह तीनों अनारो के रूप हैं. 

 नार में कौन- कौनसे विटामिन होते हैं (Which vitamins are in pomegranate) ? 


     अनार में विटामिन के(K) विटामिन सी (C )और विटामिन बी(B) पाए जाते हैं. अनार में बहुत सी मात्रा में लाभदायक प्रोटीन ,फाइबर, कार्बोहाइड्रेट और खनिज पाए जाते हैं . इसमें आयरन,पोटेशियम जिंक जैसे पोषक तत्व भी होते हैं. 

  अनार का इतिहास क्या है (What is the history of pomegranate)? 


      अनार एक ऐसा स्वादिष्ट फल जो कुदरत की देन है. वह 300 साल पुराना फल है सबसे पहले रोम के निवासी ने इसकी खोज की (Pomegranate invention)और अनार को जाना और पहचाना. रोमन वासियों अनार को अधिक बीजों वाला सेब कहते हैं.अनार के वैज्ञानिक का नाम प्यूनिक ग्रेनैटियम है. 

अलग-अलग देश और भाषाओं में अनार को अलग-अलग नामों से जाना जाता है. जैसे हिंदी भाषा में अनार, इंग्लिश भाषा में पामोंग्रेनेट, संस्कृत भाषा में दाड़िम,बांग्ला भाषा में बेदाना और तमिल भाषा में मादुलई कहा जाता है. 

अनार के सेवन का सही समय क्या है (What is the right time to consume pomegranate)? 


   1.  सुबह के नाश्ते में अनार खाने के फायदे को ऐसा माना जाता है कि यह हमारे शरीर के लिए अमृत है . सुबह नाश्ते के दौरान इसे खाना ज्यादा फायदेमंद होता है क्योंकि इसमें पोषक तत्व और विटामिन होते हैं, जो आपके अच्छे दिन की शुरुआत स्वास्थ्य के साथ करते हैं। . यह दोपहर के भोजन तक आपको एनर्जी देने काम करती है. 


2. दोपहर में दो से पांच तक तक आप कभी भी अनार खा सकते हैं. जिससे आपका पेट भी भरा रहेगा और दूसरे बेकार चीजें खाने का मन नहीं करेगा . शाम के खाने तक आपको इससे एनर्जी मिलती रहेगी.


3. अनार का सेवन कभी भी रात को नहीं करना चाहिए क्योंकि रात के वक्त हमारा मेटाबॉलिज्म काफी धीमा रहता है . इसमें मौजूद फाइबर, विटामिन और शुगर रात को आपके पेट को यह पचाना बहुत मुश्किल हो जाता है जिससे हमारे शरीर के द्वारा यह फैट में बदल सकता है.


 अनार का उपयोग कैसे करें (How to use pomegranate)? 


    यह आपकी इच्छा और पसंद पर निर्भर करता है कि आपको अनार का सेवन किस प्रकार करना ज्यादा अच्छा लगता है.


•  आप फलों की सलाद में अनार के दाने मिलाकर चाट फूर्ट की तरह सेवन कर सकते हैं. 


•  आप अनार का जूस बनाकर सेवन कर सकते हैं. अगर आप घर पर केक कस्टर्ड और आइसक्रीम बनाते हैं तो उसमें अनार डाल कर इस व्यंजन को और भी स्वादिष्ट बना सकते हैं. 


•  अनार का उपयोग हमें हमेशा सुबह या दिन में ही करना चाहिए. 



अनार के फायदे


 अनार खाने से पहले इन बातों का महत्वपूर्ण ध्यान रखें (Keep these things in mind before eating pomegranate) :-


1.  अनार की तासीर ठंडी होती है जिस किसी को भी कब्ज की शिकायत हो उसे अनार नहीं खाना चाहिए . 


2.  कुछ दवाइयों का सेवन करने पर भी अनार नहीं खाना चाहिए इससे केमिकल रिएक्शन हो सकता है.


 3.  लो ब्लड प्रेशर के रोगियों को अनार नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसकी तासीर ठंडी होती है और इसे खाने से बल्ड सर्कुलेशन की गति और धीमी हो सकती हैं 


 4.   अगर इफ्लूएंजा या खांसी है तो उन्हें अनार नहीं खाना चाहिए . क्योंकि अनार से संक्रमण और ज्यादा बढ़ सकता है.


 5. एलर्जी के मरीजों को अनार का सेवन डॉक्टर की सलाह से करना चाहिए . अन्यथा आपकी एलर्जी ज्यादा बढ़  सकती है.

अनार के चमत्कारी फायदे (Miraculous benefits of pomegranate)? 


 

प्रेगनेंसी में अनार के फायदे (Benefits of pomegranate in pregnancy):-


    जो प्रेग्नेंट महिलाए प्रतिदिन अनार का जूस सेवन करती हैं उनका बेबी हेल्दी और फिट होता है. डॉक्टरों का मानना है कि प्रेगनेंसी के दौरान अगर खून की कमी होती है तो समय से पहले डिलीवरी होने की ज्यादा संभावना रहती है. इसीलिए प्रेगनेंसी को महिलाओं को प्रतिदिन अनार  खाने से खून की कमी दूर होती है और सही टाइम पर नॉर्मल डिलीवरी होती है. अनार खाने के बाद हमेशा प्रेग्नेंट महिलाएं कुल्ला जरूर करना चाहिए.


 दस्त में अनार के फायदे (Benefits of Pomegranate in diarrhea) 


 दस्त को रोकने के लिए हमें अनार के छिलकों का उपयोग करना चाहिए. अनार के छिलकों को सुखाकर पाउडर बना लें इसे सुबह-शाम खाली पेट गुनगुने पानी के साथ सेवन करें. दस्त रोकने का यह लाभदायक उपाय है. 


 खांसी में अनार के फायदे(Benefits of pomegranate in cough) 


 खा़ंसी हो तो अनार के छिलकों को सुखाकर उनको चूसते रहें इससे खांसी जड़ से खत्म हो हो. आधा छोटा चम्मच अनार के छिलके का पाउडर, 8 तुलसी के पत्ते को पीसकर, चुटकी भर हल्दी, थोड़ा नमक,गुड़ डालकर पानी डालकर पेस्ट बना ले .फिर थोड़ा सा घी (5 बुंद) में छोकंकर शहद डालकर चाटले गुनगुने पानी के साथ.आपकी खांसी में तुरंत ठीक हो जाएगी. 


मसूड़ों में अनार के फायदे (Benefits of pomegranate in gums) 


मसूड़ों और दांतों की तकलीफ से परेशान है तो आप अनार के छिलके को सुखने के बाद जलाकर उसका पाउडर बना लें और मंजन की तरह मसूड़ों पर मले. दांत चमक उठेंगे और दांत व मसूड़ों में मजबूती आएगी . इस मंजन से दांत में कीड़े भी नहीं लगेंगे. 


 पथरी में अनार के फायदे (Benefits of pomegranate in stone) 


अनार का जूस किडनी स्टोन के लिए बहुत फायदा करता है. डॉक्टर भी होममेड  अनार का जूस पीने की सलाह देते हैं ताकि  किडनी स्टोन  जल्दी खत्म हो जाए.


एनीमिया में अनार के फायदे (Benefits of pomegranate in anemia) 


अनार एनीमिया से पीड़ित रोगियों के लिए अमृत के समान होता हैं .यह खून की मात्रा में बढ़ोतरी करती हैं इसके अलावा अनार में विटामिन सी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है जो लौहे के अवशोषण में सहायता करती हैं. एनीमिया के लक्षणों को लड़ने में अनार का पूरा सहयोग करता है प्रतिदिन सुबह नाश्ते के साथ एक गिलास घर  का बना हुआ जूस जरूर सेवन करें.


 1. एक गिलास अनार के रस में थोड़ा सा सेंधा नमक और शहद मिलाकर पीने से भूख बढ़ती है. पाचन शक्ति भी बहुत मजबूत होती है.


2. रोजाना एक अनार खाने से भी कैंसर की संभावना को रोका और कम किया जा सकता है.


3. अनार के सेवन से दिल से होने वाली बीमारियों से भी बचा जा सकता है.


4. अनार खाने या इसका रस रोज पीने से नकारात्मक भावनाएं कम होती हैं


5. अनार का जूस पीने से स्ट्रेस लेवल घटता है.


6. अनार का जूस इम्यून सिस्टम को बूस्ट करता है और शादीशुदा जिंदगी को भी खुशहाल बनाता है.इसका उपयोग सुंदरता बढ़ाने के लिए भी किया जाता है.


आशा है आपको अनार के फायदे की जानकारी पसंद आई होगी. आपको यह आर्टिकल पढ़कर कैसा लगा कमेंट करके जरूर बताइए.

Saturday, 19 December 2020

12/19/2020

benefit of ginger-अदरक के फायदे और सेहत के लिए कमाल का है अदरक

          अदरक गुणवत्ता से भरपूर एक मसाला है. इसकी की खेती पूरे भारत में की जाती है. अदरक हर घर की रसोई में मौजूद सबसे महत्वपूर्ण मसालों में से एक है. अदरक में हल्दी जैसे कई औषधीय गुण भी होते हैं. अदरक को इंग्लिश में जिंजर (Ginger) कहते हैं. कई लोकप्रिय व्यंजनों भोजन में स्वाद बढ़ाने के लिए अदरक एक महत्वपूर्ण घटक है. आयुर्वेद में इसका का उपयोग लाखों वर्षों से किया जा रहा है. अदरक गर्म होता है इसलिए ठंड के मौसम में अदरक का उपयोग अधिक किया जाता है. कोरोना में अदरक के फायदे का उपयोग  इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए रामबाण इलाज है.



        यहाँ आज हम आपको अदरक के कुछ फायदों के बारे में बता रहे हैं जो इसके नियमित सेवन के कारण हैं। हम अदरक को कच्ची ताजी, सूखे पाउडर , आयल या जूस के रूप में उपयोग कर सकते हैं.


अदरक में कौन सा विटामिन पाया जाता है ( Which vitamin is found in ginger) 


अदरक में विटामिन ए, विटामिन डी और विटामिन ई होते हैं. इसके अलावा, अदरक में मैग्नीशियम आयरन जिंक कैल्शियम होता है जिसके कारण अदरक हमारे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है. अदरक में पाए जाने वाले तत्व मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं. अदरक में एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी बैक्टीरियल और एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं जो हमें गैस अपच जैसी बीमारियों से छुटकारा दिलाते हैं.

Benefits of Ginger


अदरक का पानी पीने से क्या फायदा  (What is the benefit of drinking ginger water) ? 


अदरक का पानी पीने के ये है फायदे:-


•  अदरक पाचन से जुड़ी सभी समस्याओं में काफी राहत देता है.


•  अदरक का पानी पीने से शरीर का दर्द दूर होता हैै.


•  इम्युनिटी पॉवर बढ़ाता हैै.


•  बाल चमकदार हो जाते हैं.


अदरक वाली चाय के गुण क्या है (What is the quality of ginger tea)? 


•  मासिक धर्म के दर्द में राहत देता है.


•   सांस की बीमारियों में कारगर.


•  कोलेस्ट्रोल लेवल कम करने के लिए.


•  अदरक के फायदे की चाय का उपयोग खांसी, जुकाम और बुखार में किया जाता हैै.



खाली पेट अदरक खाने से क्या होता है (What happens by eating ginger on an empty stomach)? 


       अदरक खाने के कई फायदे हैं, लेकिन खाली पेट पर अदरक खाने से बहुत फायदा होता है. क्योंकि आपके पेट में कोई ऐसा खाद्य तत्व नहीं होता है जो आपके पेट में एसिड के साथ बंद हो जाए. खाली पेट अदरक खाने से पेट का दर्द ,उल्टी, मासिक धर्म का दर्द जैसी समस्याओं को दूर करता है.


अदरक को कैसे खाएं (How to eat ginger)? 


•   अदरक का जूस बनाकर सेवन कर सकते हैं.

•   अदरक की चाय बनाकर सेवन कर सकते हैं.

•   हम इसे मसालों के साथ खाने में शामिल कर सकते हैं.


अदरक खाने से पहले हमें कौनसी बातें ध्यान रखनी चाहिए (What things should we keep in mind before eating ginger) :-


लो ब्लड शुगर वाले को भी अदरक का सेवन नहीं करना चाहिए .क्योंकि अदरक के सेवन करने से दिल की बीमारियों का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है.

*   जिन लोगों को एसिडिटी होती है उन्हें अदरक का सेवन नहीं करना चाहिए. खाली पेट अदरक  की चाय बहुत नुकसान करती है.

Benefits of Ginger



अदरक के  11 चमत्कारी फायदे(11 miracle benefits of ginger) :-



1.   सभी महिलाएं मासिक धर्म के दर्द से जूझती रहती हैं। किसी को कम दर्द महसूस होता है तो किसी को बहुत ज्यादा होता  है.ऐसा कहा जाता है कि मासिक धर्म के दौरान रोजाना एक या 2 ग्राम अदरक पाउडर का सेवन करने से मासिक धर्म के दर्द से छुटकारा मिलता है. 


2.  अदरक का सेवन करने से अपच की समस्या से काफी हद तक छुटकारा पाया जा सकता है. 


3.  अदरक के फायदे  के डीटाॅक्स(Detox)के रूप में अदरक पेय एक महान  डीटाॅक्सीफाई (Detoxify) के रूप में कार्य करता है.


4.  अदरक का सेवन दिल की दर को सामान्य रखने के लिए अच्छे परिणाम भी दिखाता है.


5.  शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द होने पर अदरक का सेवन दर्द से राहत दिलाने का काम करता है.


6. इस कोरोना अवधि के दौरान जहां रोग  प्रतिरोधक  में वृद्धि करना बहुत महत्वपूर्ण है, वहीं इस अदरक का सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने  के फायदे में देखा गया है. 


7.   हर दिन अदरक खाने से रक्तचाप को सामान्य रखने में बहुत मदद मिलती है.


8.   अगर आपको कब्ज है तो थोड़ा नींबू का रस और अजवाइन नमक मिलाएं और उसमें अदरक डालकर खाएं, आपको कब्ज में राहत मिलेगी।. 


9.   शरीर में अतिरिक्त वसा(फैट) की मात्रा को जलाने (कम करने)के लिए अदरक बहुत फायदेमंद साबित होता है.


10.  अगर आपको भूख नहीं लगती है तो आप अदरक का अद्भुत प्रभाव दिखाएंगे. अदरक को काटकर उसमें नमक मिलाएं और इसे 15 दिनों तक दिन में एक बार खाएं.आपका पेट भी साफ हो जाएगा और आपको अधिक भूख लगेगी.

11.  त्वचा को ताजा और सुंदर और चमकदार बनाना चाहते हैं यदि आप रोज सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ अदरक खाते हैं, तो यह आपकी त्वचा पर चमक और दमक लाएगा. क्योंकि अदरक अपने उत्कृष्ट एंटी-ऑक्सीडेंट के कारण त्वचा के लिए फायदेमंद है.


       आशा है आपको अदरक के फायदे की  जानकारी  पसंद आई होगी. आपको यह आर्टिकल पढ़कर कैसा लगा कमेंट करके जरूर बताइए.

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Saturday, 12 December 2020

12/12/2020

कैसे वजन बढ़ाए और मोटा होने के आसान तरीके वह घरेलू उपचार

     आज के इस दौर में हमारे लिए फिट रहना कितना जरूरी है यह तो आप जानते ही होंगे. स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त वजन होना बहुत आवश्यक है . वजन बढ़ना एक ऐसे व्यक्ति के लिए ज्यादा जरूरी हो जाता है जिसका वजन कम हो या बहुत पतले होते हैं.



  कैसे बढ़ाएं आसानी से अपना वजन ? 

    जिस तरह मोटापा और बढ़ता हुआ वजन लोगों के लिए बड़ी समस्या है इसी तरह कई लोगों को कम वजन और बहुत पतले होने की समस्या का भी उनको सामना करना पड़ता है. वजन कम होने के कारण लोग उनका मजाक उड़ाते हैं और कहते हैं 'शायद इनको खाने को नहीं मिलता' और भी बहुत कुछ उनके पतले होने के अलग-अलग उनको ताने मारते रहते हैं इसके कारण वह खुद से हीन भावना रखते हैं और उनका कॉन्फिडेंस हमेशा कम हो जाता है. 

     आप इन बातों से घबराए नहीं बल्कि अपना वजन कैसे बढ़ाएं इसके बारे में सोचना चाहिए. आपको कुछ घरेलू तरीके और नुस्खे बताते हैं , जिससे आप चंद महीनों में आपका वजन बढ़ जाएगा. करना आपको पूरा वैसा ही है जैसा मैं आपको बताऊंगी.

कम वजन या पतले होने के साइड इफेक्ट :-


• कम वजन के कारण मन में हीन भावना आती है ,जो हमारे जिंदगी के लिए नुकसानदायक और हानिकारक हैं.

• कम वजन के कारण शादी ,पार्टी में कोई भी त्यौहार में हम लोगों के बीच जाने में कतराते हैं. यह सोचकर मेरा वजन कम है और आप हमेशा तनाव में रहते हैं.

• दुबले- पतले होने के कारण शारीरिक गतिविधियों में भी हमें बहुत थकान और कमजोरी लगती है.

• व्यक्ति दुबले -पतले होने के कारण बहुत बार अपने मनपसंद के कपड़े भी नहीं पहन पाते हैं,जो उनका मन करता है.

• कम वजन के कारण वह दोस्त से परिवार और समाज से दूर रहने लगता है और वह अकेला रह जाता है. 

• वजन कम होने के कारण उनका आत्मविश्वास इतना कम हो जाता है कि वह किसी के सामने जाना भी पसंद नहीं करते हैं .

• कम वजन वाले व्यक्ति की सोच इस तरह नेगेटिव विकसित हो जाती है.

वजन बढ़ाने से पहले इन बातों का ध्यान रखें :-


1. जल्दी से वजन बढ़ाने के लिए दिन भर में 4 से 5 बार हमें भोजन करना चाहिए.

2. अपनी डाइट में पर्याप्त प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट और स्वास्थ्यवर्धक वसायुक्त भोजन करे.

3. खाना खाने से पहले पानी नहीं पिए.

4. प्रतिदिन हमेशा दिन में तीन बार सुबह, दिन को शाम को एक एक गिलास दूध पिए.

5. अखरोट ,मक्खन ,फल, दूध, दही नटस,बीज और पालक वजन बढ़ाने वाली सब्जियां सबसे ज्यादा मात्रा में लें .

6. पानी ज्यादा से ज्यादा पिए और तनाव से मुक्त रहे . 

7. खाना हमेशा खुश मन से खाए आप उदास और तनाव के साथ खाना ना खाए.

8. मोटा होने के लिए दवाइयां ना खाये इससे अच्छा है आप पोषक तत्व वाला खाना खाए.

9. स्नेक्स फल ड्राई फ्रूट्स च्यवनप्राश आदि ले.


https://healthcare108108.blogspot.com/2020/12/weight-gain.html?m=0



 

वजन बढ़ाने के घरेलू नुस्खे और वजन बढ़ाने के लिए क्या खाएं :-


आलू - आलू को डेली डाइट में खाने में शामिल करना चाहिए क्योंकि आलू में कार्बोहाइड्रेट और कॉन्प्लेक्स शुगर होता है . जो वजन बढ़ाने में हमारी काफी मदद करता है . आलू में विटामिन ए विटामिन बी और विटामिन सी होने के कारण यह हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक है. 

शुद्ध घी और शक्कर - घी खाने से भी वजन बढ़ता है क्योंकि इसमें काफी मात्रा में कैलोरी होती है .घी में फैट अधिक मात्रा में होता है.जबकि शक्कर में बहुत से अधिक मात्रा में शर्करा होती है .वजन बढ़ाने के लिए अपने खाने में घी और शक्कर शामिल करें.

किशमिश- मुनक्का -अंजीर - रोजना हमें यह तीन चीजें खाने चाहिए इससे वजन तेजी से बढ़ता है. आप अंजीर मुनक्का किशमिश को रात में भिगोकर सुबह उठकर खाये यह वजन बढाने में रामबाण इलाज है.

केला - वजन बढ़ाने में सबसे ज्यादा कारगर है केला . प्रतिदिन आप केले खाने से आपका वजन जरूर बढेगा.केले को दूध के साथ या शेक बनाकर कर भी आप ले सकते हैं .केले में काफी मात्रा में कैलोरी होती है और हमें एनर्जी भी प्रदान करती है.

पर्याप्त नींद- हमारे जीवन के लिए जिस तरह भोजन और पानी की आवश्यकता है ठीक उसी प्रकार हमें भरपूर नींद लेना बहुत आवश्यक है .लोगों को हर रोज कम से कम 8 घंटे प्रतिदिन सोना चाहिए. पर्याप्त नींद से भी वजन के साथ जुड़ा हुआ है . आप अगर पर्याप्त नींद लेते हैं आपके शरीर को भी आराम मिलेगा और जो भी आपने खाया उसका आपके शरीर पर जरूर असर दिखाएगा.

बादाम - बादाम काफी हद तक वजन बढ़ाने में रामबाण इलाज है. इसके लिए 10-15 बादाम रात भर पानी में भिगोकर सुबह पीसकर दूध के साथ ले .दो महीने तक आप लगातार करें तो आपका वजन जरूर बढ़ेगा.

एक्सरसाइज और व्यायाम करें- व्यायाम करने से हमारे शरीर के लिए कितने फायदेमंद है यह तो आप भी जानते होंगे .व्यायाम करने से हमें हमारी भूख खुलती है और ऐसा करने के हमारे शरीर में खाना अच्छी तरह से पचता है और शरीर मजबूत भी रहता है . वजन बढ़ाने के लिए योग करना,प्राणायाम करना,दौड़ना,बैडमिंटन खेलना, क्रिकेट और फुटबॉल खेलना ऐसा करने के बाद आपको जोर से भूख लगेगी और आप ज्यादा से ज्यादा खाना खा सकते हो.

अनार - अनार का रस प्रतिदिन पीने से भी वजन बहुत तेजी से बढ़ता बहुत तेजी से बढ़ता है


वजन बढ़ाने के लिए क्या नहीं खाना चाहिए


   बहुत से लोग वजन बढ़ाने के चक्कर में बहुत जमकर जंक फूड खाते हैं, जो सही नहीं हैं उस से से मोटापा बढ़ेगा या नहीं पर पेट बहुत खराब हो जाएगा .जिससे हमें अनेक बीमारियां हो सकती है. ज्यादा जंक फ़ूड से परहेज करें.

   अगर यह सब करने के बाद भी आपका वजन नहीं बढ़ता है तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें और पूरी शरीर का चेकअप कराएं . इससे यह पता चल जाएगी कि आपका वजन किस बीमारी के कारण नहीं बढ़ रहा है. अगर ऐसा है तो आप डॉक्टर के अनुसार उस बीमारी की दवाई ले.

   दोस्तों वजन बढ़ाना कोई मुश्किल काम नहीं है अगर आपकी दिनचर्या सही हैं और सही खान-पान आप अपनाएंगे तो आपका वजन जरूर बढेगा . 


    बस आपको करना यही है वजन बढ़ाने का तरीका जो मैंने बताए हैं उसे अपनाना है .अगर आपको वजन कम करने से निजात पाना है तो आप यह अवश्य करेंगे . 


    मुझे आशा है कि आप को यह आर्टिकल जरूर पसंद आया होगा तो आप कमेंट और फॉलो करें और अपने दोस्तों के साथ ज्यादा से ज्यादा शेयर करें.

Sunday, 6 December 2020

12/06/2020

कोरोना काल में अस्थमा का कैसे रखें ख्याल और उपचार?



      अस्थमा क्या है ? 


         अस्थमा एक ऐसी बीमारी है, जिसमें फेफड़ों के अंदर जाने वाले वायु मार्ग सिकुड़ जाते हैं और बलगम पैदा करने लगते हैं. जब ऐसा होता है तो सांस लेना कठिन हो जाता है, जिस वजह से दमे का अटैक हो सकता है. इनमें एलर्जी, जुकाम का वायरस, दवाइयां, धूल मिट्टी, ज्यादा कसरत करना आदि कारण हो सकते हैं.


 अस्थमा के लक्षण


•  दमा के रोगियों में सामान्य से तेज गति से सांस चलने लगती है या सांस लेने में बहुत अधिक कठिनाई होती है.

•  अस्थमा के रोगियों को घबराहट ज्यादा होती है और छाती में जकड़न सी महसूस होती है,साथ ही धड़कनें भी तेज हो जाती हैं.

•  अस्थमा के रोगियों में गले में खुजली होती है और हर शारीरिक गतिविधियों में थकान महसूस होती है,बार-बार खाँसी आना और अधिकतर दौरे के साथ खाँसी आना.
•   साँस लेते समय सीटी की आवाज आना.
•   छााती में जकड़ाहट तथा भारीपन और
साँस फूलना.
•    खाँसी के समय कठिनाई होना और कफ न निकल पाना.
•    गले का अवरूद्ध एवं शुष्क होना और बेचैनी होना.
•    नाड़ी गति का बढ़ना.


अस्थमा के  लक्षण और  अस्थमा के प्रकार की पूरी जानकारी के लिए यह पढ़िए.



अस्थमा के उपचार


  अस्थमा के रोगी क्या करे और क्या ना करे ? 


  क्या करे


•  सुबह की ताजी हवा में बाहर घूमने जरूर जाना चाहिए, इससे सुबह की साफ ऑक्सीजन मिलने से फेफड़े मजबूत होंगे.

•  अपने भोजन में गेहूं, पुराने चावल, मूंग दाल, चने की दाल, जौ और को शामिल करें

•  रोज श्वसन व्यायाम, योग और प्राणायाम करें

•   अपने खाने में लहसुन, अदरक और मिर्च का इस्तेमाल करें।

•   अस्थमा से छुटकारा पाने के लिए शहद और गुनगुना पानी  का सेवन करें.


  क्या न करें


•   अस्थमा के रोगी ज्यादा व्यायाम ना करें और प्राणायाम करते समय भी सांस की गति तेज न करें.

•   खाने-पीने में भी अस्थमा के रोगियों को खास सावधानी रखनी चाहिए.  कम तेल का  भोजन खाना  चाहिए. ज्यादा खट्टा खाने से भी बचना चाहिए.

•   भारी खाना, काले चने, मछली, मांस,तला हुआ  एवं सरसों न खाएं.

•   जुकाम और उमस भरे वातावरण से बचें.

•   ठंडा पानी, मिठाई, दही और बासी  फ्रीज में रखा गया खाना न खाएं.

•  अत्यधिक व्यायाम न करें.

•  धूम्रपान, धूल या धुएं वाली जगहों एवं प्रदूषित पर्यावरण में जाने से बचें.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, अस्थमा क्या है  पढ़े


  अस्थमा के रोगी कैसे रखें   कोरोना काल में  विशेष सावधानी ? 

            

    अस्थमा  रोगियों पर कोरोना वायरस  बहुत ज्यादा प्रभावित कर सकता है, क्योंकि इनके फेफड़े  पहले से कमजोर होते हैं. जिससे कोरोना वायरस होने पर इनका संक्रमण इनके फेफड़ों को बहुत जल्दी खराब कर सकता है.


             कोविड की वजह से अब लोग काफी  सहमें और डरे हुए हैं. थोड़ी-सा जुकाम- छींक - खांसी आने पर डर लगा रहता है कि कहीं कोरोना तो नहीं हो गया, लेकिन कोरोना के लक्षण हर किसी में एक जैसे नहीं होते हैं अलग अलग होते है. ऐसे लोग जिनकी इम्यूनिटी अच्छी होती है, उन्हें कोरोना वायरस कुछ खास प्रभावित नहीं कर पाता है और जल्दी ठीक हो जाते हैं. चिंता करने वाली बात उन लोगों के लिए है, जो पहले से ही किसी ना किसी बीमारी से पीड़ित हैं और उस वजह से उनकी इम्यूनिटी कमजोर है. इसके कारण से अस्थमा रोगियों को कोरोना वायरस बहुत ज्यादा प्रभावित कर सकता है, कोरोना वायरस से बचने के लिए कैसे इसका ख्याल रखा जा सकता है.


   अस्थमा का अटैक आने पर क्या करें  ? 


1. चाय, कॉफी या गुनगुना पानी पीएं जिससे सांस नलिकाओं को खुलने में मदद मिलेगी.

 2. अटैक आने पर घबराएँ नहीं बल्कि  आरामदायक स्थिति  या कमर को सीधा रखकर बैठ जाएं अगर बैठा नहीं रह सकते तो सीधा खड़े हो जाये और गहरी सांस  लेते रहे. अटैक आने पर लेटना नहीं चाहिए इससे स्थिति बिगड़ जाती है.

3. इन्हेलर और नेब्युलाइज़र, जो दवा के साथ उपयोग किया जाता है,जिसे फेफड़ों में गहराई सांस मिलने में मदद मिलती हैं.



  अस्थमा के आर्युवैदिक उपचार और कोरोना काल में अस्थमा रोगी उपयोग करें  ये उपाय


• अदरक 

अदरक की तासीर  गर्म होती है, इसलिए यह दमा के रोगियों को बहुत फायदा पहुंचाने में मदद करती है. अदरक अस्थमा के खिलाफ लड़ाई में बहुत लाभदायक है. सभी प्रकार की श्वसन क्रियाओं  के उपचार के लिए आप  अदरक गीली सूखे दोनों उपयोग कर सकते हैं क्योंकि इसमें एंटी-ऑक्सिडेंट और दर्द को दूर करने वाले गुण होते हैं. यह फेफड़ों में जाने वाले वायु मार्ग से अतिरिक्त बलगम और सूजन को खत्म करता है और उन्हें आराम भी देता है.

अदरक की चाय में लहसुन की 4 पिसी कलियाँ मिलाकर पिएं. यह अस्थमा का रामबाण इलाज करता है.

अदरक का एक चम्मच ताजा रस, एक कप मेथी का काढ़ा और स्वादानुसार शहद इस मिश्रण में मिलाएँ. दमा के मरीजों के लिए यह बहुत लाभदायक है.


 • लहसुन

अस्थमा का रामबाण इलाज करने के लिए आपको लहसुन का इस्तेमाल करना चाहिए. लहसुन अस्थमा के रोगियों के लिए बहुत लाभदायक होता है. लहसुन में एंटी वायरल और एंटीऑक्सिडेंट के गुण पाए जाते हैं, जिससे अस्थमा के रोगियों को बहुत फायदा होता है. अस्थमा के रोगी को  दूध में लहसुन की 4-5 कलियां उबालकर रोज लेना चाहिए . इससे अस्थमा में आराम मिलेगा.


• लौंग

सुबह -सुबह 3-4 लौंग को एक गिलास पानी में 5 मिनट तक उबालें. फिर इसे छानकर इसमें शहद मिलाकर गरमा-गरम पीने से अस्थमा में फायदा होता है. 


• अजवायन

अस्थमा से अनेक लोग पीड़ित रहते हैं. अगर आप  अस्थमा के रोगी हैं तो आपके लिए बेहद आसान उपाय है. अस्थमा का जड़ से हटाने के लिए आप पानी में अजवायन डालकर इसे उबालें और अजवाइन के उबले हुए पानी की भाप लेने से भी दमा के रोगी को राहत मिलती है. यह अस्थमा का जड़ से  मिटाने के लिए आसान रामबाण उपाय है.


• हल्दी

हल्दी बहुत ही गुणकारी मसाला है. इसलिए अगर आप अस्थमा  ना हो और अस्थमा का का सफल  उपचार करना चाहते हैं तो दूध में हल्दी प्रतिदिन डालकर पिएँ.


• तुलसी

तुलसी  लोंग तेज पत्ता,सोंठ, सेंधा नमक, जीरा, भुनी हुई हींग और तुलसी के पत्ते को पीसकर एक गिलास पानी में उबाल लें। इसे पीने से अस्थमा की समस्या दूर हो जाएगी.


• नीलगिरी तेल

नीलगिरी के तेल में नीलगिरी रहताहै और नाक के द्वारा वायु मार्ग को साफ करने के लिए बहुत अच्छा माना जाता है क्योंकि, इसमें बलगम को तोड़ने की ताकत होती है। यह अस्थमा  और दमा के घरेलू उपाय का सबसे अच्छा तरीका है। एक तौलिया या नैपकिन पर इस तेल की कुछ बूंदें डालें और जब आप सो रहे हों, तो इसे अपनी नाक के करीब रखें. आप उबले हुए गर्म पानी  में तेल की कुछ बूंदें डालकर सीधे भांप ले सकते हैं.


•  शहद

अस्थमा का दौरा बार-बार न पड़े इसलिए हल्दी और शहद और अदरक का रस मिलाकर चाटना चाहिए. यह अस्थमा के सफल इलाज  में  सहायक है.


• अंजीर
अंजीर कफ जमने से भी रोकता है. सुखी अंजीर को पानी में रात भर भिगोकर रख दें. सुबह खाली पेट इसे खाले और उसका पानी पी ले ऐसा करने से वायु मार्ग में जमा हुआ बलगम ढीला होकर बाहर निकल जाता है यह अस्थमा का सफल इलाज है.


         आर्टिकल में हमने आपको दमा अस्थमा से संबंधित जरूरी बातों को बताने की कोशिश की है. उम्मीद है आपको हेल्थ केयर की दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी.


      इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और उनके  उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है.यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है. यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहां बताया गया है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें. यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें. यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको होने वाले किसी भी तरह से संभावित नुकसान के लिए  Health care system जिम्मेदार  नहीं होगा.


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Monday, 30 November 2020

11/30/2020

अस्थमा क्या है , कैसे करें इलाज?


अस्थमा बीमारी कैसे होती है ? अस्थमा बीमारी का इलाज  कैसे करें ? 



         नमस्कार दोस्तों!   21वीं सदी में, ग्लोबल वार्मिंग और वायु प्रदूषण के कारण अस्थमा दुनिया में बहुत तेज़ी से फैल रहा है. जिसके कारण से बहुत सारे लोगों को अपनी ज़िदगी से हाथ धोना पड़ता है. हर मनुष्य को जीवित रहने के लिए हवा पानी के साथ सांसों की भी जरूरत होती है. मनुष्य का जीवन चलता ही सांसों से है और जब मनुष्य को सांस लेने में तकलीफ होने लगती है, तो इस कारण को दमा और अस्‍थमा रोग कहते हैं. अस्‍थमा के रोगियों को सांस लेने में दिक्‍कत होती है और कभी-कभी अचानक सांस रूक जाने से दम घुटने लगता है.


       अस्‍थमा फेफड़ों को खास रूप से प्रभावित करता है. इसके कारण व्‍यक्ति के श्‍वसन संबंधी बीमारियां होने का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है. दमा आजकल केवल बुर्जुगों में ही नहीं बल्कि युवाओं और बच्‍चों में भी देखने को बहुत मिल रहे है. बच्‍चों और बड़ों में होने वाला अस्‍थमा एक ही प्रकार का होता है.    


  विश्व सवास्थ संगठन के अनुसार दुनिया भर में लगभग  300  मिलियन लोगों को अस्थमाहै.जिनमें  से 25 से 30 मिलियन भारत में हैं . विश्व सवास्थ संगठन  ने दमा और अस्थमा के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए काफी प्रयास किए हैं, इसी कारण हर साल 5 मई को विश्व दमा दिवस के रूप में मनाया जाता है.

     अस्थमा रोग क्या है ? 


     अस्थमा एक बीमारी है हमारे शरीर में जिसमें विंड पाइप है जिससे सांस लेते  और फेफड़े तक हवा जाती है हमारे वायुमार्ग की परत सूज जाती है और उनके आसपास की मांसपेशियां कस जाती हैं. बलगम फिर वायुमार्ग को भरता है, जिससे आगे गुजरने वाली हवा की मात्रा कम हो सकती है. जिससे आपको सांस लेने में तकलीफ और फेफड़ों में जकड़न सी महसूस होती है और बलगम इकट्ठा हो जाता है तब फेेेफड़ों अस्थमा की समस्या हो जाती है.जो मुख्य तौर पर फेफड़ों के वायु मार्ग को प्रभावित करती है जिससे मनुष्य को सांस लेने में तकलीफ होती हैं. यह कुछ दैनिक गतिविधियों मे मुश्किल भी पैदा कर सकती है.

    अस्थमा की वजह से उसे कई समस्याएं होती है जैसे सांस लेने, जोर-जोर से सांस लेना, खांसी होना, सांस का फूलना इत्यादि होती हैं. अलग - अलग लोगों पर अस्थमा का असर भी अलग-अलग होता है, कुछ लोगों के लिए यह एक समस्या होती है,तो वहीं कुछ लोगों को इसकी वजह से बहुत परेशानी भी झेलनी पड़ती हैं.

Asthma symptoms


  कितने प्रकार का होता है     अस्थमा ? 

        वैसे तो अस्थमा के कई प्रकार होते हैं लेकिन कुछ सामान्य अस्थमा जो पाए जाते हैं वे इस प्रकार हैं:


1.  एलर्जिक अस्थमा

       एलर्जिक अस्थमा के दौरान आपको किसी चीज से एलर्जी है जैसे धूल-मिट्टी साबुन, परागकण, जानवरों के बाल, स्मोकिंग, परफ्यूम, प्रदूषित वायु के संपर्क में आते ही आपको दमा हो जाता है.  ऐसे में एलर्जिक से दूरी बनाएं रखने के लिए बाहर जब भी जाये तब मास्क पहनकर बाहर निकलना चाहिए.


2.  एक्सरसाइज इंड्यूस्ड

   कई लोगों को एक्सरसाइज या अपनी क्षमता से अधिक कार्य करने लगते हैं जिससे बहुत थकान हो जाती हैं तब वे अस्थमा के शिकार हो जाते हैं.
एक्सरसाइज के दौरान विंड पाइप में ठंडी हवा शरीर में अधिक प्रवेश कर जाती और खिंचाव पैदा करती है. दिल की धड़कनें बढते लगती हैं और फिर व्यक्ति मुंह से सांस लेता और छोड़ता है. इसलिए हमें हमेशा हल्के वॉर्मअप के साथ व्यायाम शुरू करना चाहिए. व्यायाम करने से पहले ट्रेनर की सलाह जरूर लेनी चाहिए.

3.  नाइट-टाइम अस्थमा

         ये अस्थमा का ऐसा प्रकार है जो रात के समय ही होता है और रात में असर दिखाता है. इस कारण से मरीजों में ज्यादातर अटैक रात के समय ही आता है .रात के समय अस्थमा का अटैक पड़ने लगे तो आपको समझ जाना चाहिए कि ये नाइट-टाइम अस्थमा का अटैक हैं.  नाइट- टाइम अस्थमा को नॉक्टेर्नल और नॉक्चरल अस्थमा भी कहते है. इसमें मरीज को सुबह और शाम दवा हमेशा लेनी चाहिए और हमेंशा इन्हेलर अपने पास रखना चाहिए.

4.   चाइल्ड ऑनसेट

           ये अस्थमा का वो प्रकार है जो सिर्फ बच्चों को ही होता है. इससे मरीज 4 से 16 वर्ष तक के बच्चों में अस्थमा के लक्षण दिखते हैं.70 फीसदी मामलों में यह आनुवांशिक और 30 प्रतिशत में एलर्जी के कारण होता है. अस्थमा पिडित बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होता जाता है तो बच्चा इस प्रकार के अस्थमा से अपने आप कम होने लगता है साथ में हमें एलर्जी के कारणों का पता लगाकर गंभीरता जानने के लिए डाक्टर की सलाह से इसका सही समय पर उपचार जरूर कराना चाहिए.

5. एडल्ट ऑनसेट

‌     इसमें अस्थमा का आनुवांशिक लक्षण बचपन में न दिखकर 20 वर्ष की आयु के बाद लक्षण प्रभावी होता है. इस प्रकार के अस्थमा के पीछे एलर्जी के बहुत से कारण छुपे होते है. हालांकि इसका मुख्य कारण प्रदूषण, प्लास्टिक, अधिक धूल मिट्टी और जानवरों के साथ रहने पर होता है. जिस चीज से एलर्जी है उस से दूरी बनाए रखें और घर में साफ सफाई रखें.

6.  व्यावसायिक अस्थमा-

    व्यावसायिक अस्थमा, जैसे रासायनिक धुएं, गैसों या धूल से उत्पन्न और कार्यस्थल में मौजूद एक एलर्जेन या इरिटेंट्स के संपर्क में आने से होता है. इससे अ के लिए मास्क लगा कर रखें.

7. मौसमी अस्थमा-

इस प्रकार का अस्थमा एलर्जी जो आसपास के वातावरण में होता है। 
बहुत अधिक आर्द्रता या कम तापमान जैसी स्थितियां मौसमी अस्थमा है.जैसे- सर्दियों में ठंडी हवा या गर्मियों में पराग ये मौसमी अस्थमा के लक्षण हैं।

अस्थमा के लक्षण कौन-कौन से हैं ? 


अस्थमा के सामान्य लक्षण ये हैं :–

• खांसी खासकर रात और सुबह के समय ।
•  सांस लेते और छोड़ते समय सीटी बजना या आवाज आना ।
•  सांस लेने में तकलीफ होना ।
•  सीने में जकड़न या दर्द होना
•  खांसी,जकड़न और घरघराहट के कारण नींद न आना

अस्थमा की रोकथाम कैसे करें ? 

    अस्थमा को कंट्रोल करना बहुत लंबी लड़ाई है, जिसे अस्थमा के मरीज को खुद को लड़ना पड़ता है। लेकिन, डॉक्टर की सहायता से इस काम को आसान किया जा सकता है।


दमा और अस्थमा से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए हमें पांच सावधानियां रखनी चाहिए -:

1.  समय-समय पर दवाई लेना- अस्थमा से पीड़ित को अपनी सेहत का विशेष खयाल रखना चाहिए और डॉक्टर द्वारा दी गई दवाईयों को सही समय पर लेनी चाहिए।

2. अस्थमा से पीड़ित सभी लोगों को अस्थमा प्लान को अपनाना चाहिए ताकि उन्हें किसी भी कठीनाईयों का सामना न करना पड़े।
3.  वैक्सिन करना- अस्थमा के मरीज को स्वस्थ रहने के लिए समय-समय पर वैक्सिन लेनी चाहिए।


4.  दमा से पीड़ित व्यक्ति के लिए योगा करना सही रहता है पर डाक्टर की सलाह से जैसे धनुरासन, उष्ट्रासन, शवासन इत्यादि योगा दमा के लिए लाभदायक है।

5.  सभी लोगों के लिए अस्थमा से बचने के लिए अस्थमा ट्रीगर को पहचानना बहुत जरूरी है। 

लोगों को डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए? 

 •  अगर किसी मनुष्य को प्रतिदिन काम करते समय खांसी, सांस लेने में तकलीफ, इत्यादि परेशानी होती है तो उसे डॉक्टर से मिलना चाहिए। 

•   सांस लेने में लगातार तकलीफ बढ़ने पर तुरंत डाक्टर से इलाज  कराना चाहिए.

•    इनहेलर का इस्तेमाल करने पर भी स्थिति में कोई सुधार न आना

•     सामान्य या कम थकान वाली दैनिक गतिविधियों के दौरान सांस में कमी आना

    अस्थमा के गंभीर अटैक जानलेवा हो सकते हैं। अगर ऊपर दिए गए लक्षणों में से आपको कोई भी लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं क्योंकि बीमारी जितनी पुरानी होगी उतनी ही तकलीफ ज्यादा बढ़ेगी 


ऐसी लक्षण में उसे तुरंत डॉक्टर मिलकर इसका इलाज शुरू कराना चाहिए.

आर्टिकल में हमने आपको दमा और अस्थमा से संबंधित जरूरी बातों को बताने की कोशिश की है. उम्मीद है आपको हेल्थ केयर की दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी. अगर आपको इस बीमारी से जुड़े किसी अन्य सवाल का जवाब जानना है, तो हमसे जरूर पूछें. हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्सर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंगे. अपना ध्यान रखिए और स्वस्थ रहिए.
हेल्थ केयर सिस्टम की सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है.